Uncategorized काठ के लोग लोग काठ हो गए —चलते हैं, साँस लेते हैं,पर भीतर कहीं कुछ नहीं हिलता। सवाल सामने खड़ा है,बिलकुल नंगा,फिर… January 15, 20261 min read